tag:blogger.com,1999:blog-11728010.post-66628723798374621962007-12-10T16:54:00.000+05:302007-12-10T16:58:27.697+05:30धर्मवीर भारती की एक कविताआजकल मेरी हालत थोडी अजीब सी है। मेरे पास छोटे छोटे टुकडों मे बहुत वक़्त है लेकिन एक साथ इतना वक्त नही कि कोई महत्वपूर्ण काम कर सकूं। इसलिए कभी कवितायें पढता हूँ, कभी ब्लोग, कभी कुछ रेकॉर्ड करता हूँ, तो कभी कुछ पोस्ट। इसी तरह फुरसत मे वक्त गुजारते हुए धर्मवीर भारती की यह कविता, जो कि मुझे बहुत प्रिय है, रेकॉर्ड कर ली।<br /><br />थोडा सुनकर देखा जाये।<br /><br /><object height="20" width="400"><param name="movie" value="http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://vikash.lifelogger.com/media/audio0/599858_hiwtlylzhz_conv.flv&autoStart=false"><embed src="http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://vikash.lifelogger.com/media/audio0/599858_hiwtlylzhz_conv.flv&autoStart=false" type="application/x-shockwave-flash" height="20" width="400"></embed></object><br /><blockquote>...क्योंकि सपना है अभी भी<br />इसलिए तलवार टूटी अश्व घायल<br />कोहरे डूबी दिशाएं<br />कौन दुश्मन, कौन अपने लोग, सब कुछ धुंध धूमिल<br />किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी<br />...क्योंकि सपना है अभी भी!<br /><br /><br />तोड़ कर अपने चतुर्दिक का छलावा<br />जब कि घर छोड़ा, गली छोड़ी, नगर छोड़ा<br />कुछ नहीं था पास बस इसके अलावा<br />विदा बेला, यही सपना भाल पर तुमने तिलक की तरह आँका था<br />(एक युग के बाद अब तुमको कहां याद होगा?)<br />किन्तु मुझको तो इसी के लिए जीना और लड़ना<br />है धधकती आग में तपना अभी भी<br />....क्योंकि सपना है अभी भी!<br /><br /><br />तुम नहीं हो, मैं अकेला हूँ मगर<br />वह तुम्ही हो जो<br />टूटती तलवार की झंकार में<br />या भीड़ की जयकार में<br />या मौत के सुनसान हाहाकार में<br />फिर गूंज जाती हो<br /><br /><br />और मुझको<br />ढाल छूटे, कवच टूटे हुए मुझको<br />फिर तड़प कर याद आता है कि<br />सब कुछ खो गया है - दिशाएं, पहचान, कुंडल,कवच<br />लेकिन शेष हूँ मैं, युद्धरत् मैं, तुम्हारा मैं<br />तुम्हारा अपना अभी भी<br /><br /><br />इसलिए, तलवार टूटी, अश्व घायल<br />कोहरे डूबी दिशाएं<br />कौन दुश्मन, कौन अपने लोग, सब कुछ धूंध धुमिल<br />किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी<br />... क्योंकि सपना है अभी भी!</blockquote><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/11728010-6662872379837462196?l=vikashkablog.blogspot.com'/></div>विकास कुमारhttp://www.blogger.com/profile/01373877834398732074vikash.iitb@gmail.com5