तो मैं भी
कलम उठाने से कवितायें लिखी जा सकती
या फिर पैदा किये जा सकते विचार
या लहलहायी जा सकती एक क्रांति
या फिर सहेजा जा सकता कोई चिंतन
- तो उठा लेता मैं भी.
बस कह भर देने से आ सकता परिवर्तन
या उड़ेली जा सकती समझ
या बाँटी जा सकती संवेदना
या साबित किया जा सकता प्रेम
- तो कह देता मैं भी.
यदि सो जाने से संजोये जा सकते स्वप्न
या धकेली जा सकती चिंतायें
या रोकी जा सकती भटकन
या मिल सकती जीवन ऊर्जा
- तो सो जाता मैं भी.
बस कह भर देने से आ सकता परिवर्तन
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- तो कह देता मैं भी.
वाह क्या भाव है बहुत सुन्दर
सुन्दर अभिव्यक्ति है शुभकामनायें
वाह क्या भाव हैं सुंदर अगर कह भर देने से हो जाते
तो कह देता मैं भी..
सो कर देखे जाने वाले स्वप्न नहीं,जागती आँखों वाले सपनों की जरूरत है हमें ।
खूबसूरत कविता । आभार ।
वाह भाई,, बेहतरीन...
लेकिन है सचमुच अच्छा :-)
:)
कह तो दिया आपने..... ;) और लिख भी डाली कविता....देखिए परिवर्त्तन तो आएगा हीं, और नहीं कहीं तो कम से कम कविता लिखने के तरीके और सलीके में..
आपने बहुत हीं बढिया लिखा है।
बधाई स्वीकारें।
-विश्व दीपक
अद्भुत लिखते हो दोस्त ....
:) beautiful
विकास भाई...क्या अद्वितीय सा लिखते हो यार....रोंगटे खड़े हो जातें है ....कोई जवाब नहीं आपका... आपका पूरा ब्लॉग मैं अब तक कम से कम २० बार पढ़ चूका हूँगा...लेकिन जब भी पढता हूँ ...हरदम नयापन सा लगता है....लेकिन आप हैं कहाँ आजकल....मेरे ब्लॉग पर आना तो बिलकुल बंद ही कर दिए हैं आप....
देर से पढ़ा ।
लेकिन इतनी भी देर नहीं हुई कि तारीफ ना की जा सके ।
लिखी थी कविता तो बैचलर थे ।
खत्म हो चुकी अब बैचलरी ।
kavita mein shabd simit aur bhav adhik hain... bahut sunder rachna hai.
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