हिन्दी के हाइकू
१.
अंधेरी रात
नैन बाण लहके
प्रेम पनपा.
२.
सफ़ेद खादी
नमक की गरमी
बापू अमर
३.
कहो ना कुछ?
मौन की अभिव्यक्ति
मैं नासमझ.
४.
मैं पतझड़
प्रियतमा वसंत
सुहाना समां.
५.
गर्म चुंबन
लिपटे हुए तुम
ठंढे आदर्श.
अंधेरी रात
नैन बाण लहके
प्रेम पनपा.
२.
सफ़ेद खादी
नमक की गरमी
बापू अमर
३.
कहो ना कुछ?
मौन की अभिव्यक्ति
मैं नासमझ.
४.
मैं पतझड़
प्रियतमा वसंत
सुहाना समां.
५.
गर्म चुंबन
लिपटे हुए तुम
ठंढे आदर्श.
बहुत सुन्दर हाईकु हैं बधाई
तो हिन्दी में तमीज के साथ 'हाइकू' लिखने वाला मिल ही गया ! मैं आज अति प्रसन्न हुआ। ई मेल से सब्सक्राइब कर रहा हूँ।
behad sunder........
मैं पतझड़
प्रियतमा वसंत
सुहाना समां. बहुत सुंदर, अति सुंदर...
एक सुझाव
विद पिक्चर और भी अच्छे हो जाते है।
बढ़िया हाईकु.
गिरिजेश जी ने संकेत कर दिया । शानदार हाइकू ! अंतिम ने तो विचित्र बना दिया -
गर्म चुंबन
लिपटे हुए तुम
ठंढे आदर्श.
antim
sarvpratim
mann ki tim tim
सुंदर हाइकू देने के लिए धन्यवाद !!
http://gunjanugunj.blogspot.com
Post a Comment