हिन्दी के हाइकू

१.
अंधेरी रात
नैन बाण लहके
प्रेम पनपा.

२.
सफ़ेद खादी
नमक की गरमी
बापू अमर

३.
कहो ना कुछ?
मौन की अभिव्यक्ति
मैं नासमझ.

४.
मैं पतझड़
प्रियतमा वसंत
सुहाना समां.

५.
गर्म चुंबन
लिपटे हुए तुम
ठंढे आदर्श.

8 टिप्पणियाँ

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Nirmla Kapila said...

बहुत सुन्दर हाईकु हैं बधाई


गिरिजेश राव said...

तो हिन्दी में तमीज के साथ 'हाइकू' लिखने वाला मिल ही गया ! मैं आज अति प्रसन्न हुआ। ई मेल से सब्सक्राइब कर रहा हूँ।


VaRtIkA said...

behad sunder........


फिल्म जगत से कुछ said...

मैं पतझड़
प्रियतमा वसंत
सुहाना समां. बहुत सुंदर, अति सुंदर...

एक सुझाव

विद पिक्चर और भी अच्छे हो जाते है।


Udan Tashtari said...

बढ़िया हाईकु.


हिमांशु । Himanshu said...

गिरिजेश जी ने संकेत कर दिया । शानदार हाइकू ! अंतिम ने तो विचित्र बना दिया -
गर्म चुंबन
लिपटे हुए तुम
ठंढे आदर्श.


SABR JABALPURI said...

antim
sarvpratim
mann ki tim tim


Manoj Bharti said...

सुंदर हाइकू देने के लिए धन्यवाद !!

http://gunjanugunj.blogspot.com

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