पागलपन



जब मैं जागूँ
और तुम्हारा हँसता हुआ गीला चेहरा मयस्सर हो.
तुम्हारे बालों से टपकती बूँदे,
मेरे गालों को चूमती दिखें.
और बिछावन की सिलवट पर
कल रात वाला गुलाब सूखता हो.
और तुम्हारी आँखों में
प्यार भरी शिकायत हो -
कि ठंडी होती चाय बनाने के लिए
तुमने कितनी मशक्कत की है.

तब मैं समझूँगा
कि आज जो मैं तुम पर पागल हूँ –
वो पागलपन नहीं है.

5 टिप्पणियाँ

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ओम आर्य said...

sundar abhiwyakti.......


कंचन सिंह चौहान said...

hamesha ki tarah behatareen


हिमांशु । Himanshu said...

बढ़िया है ।


Vipin said...

:-).


Anonymous said...

sach mein pagal kar diya aap ne hamein...
bahut hi sundar hai..

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