याद

जब -
सब अपने नगमों की नुमाइश लगाते हैं
और बदले में औरों की वाहवाही पाते हैं

तो -
मुझे तुम्हारी जबरदस्त याद आती है
क्यूंकि तुम बिन मेरी कवितायें खो जाती हैं

और -
नज्म हो भी तो नुमाइश का मन नहीं होता
तुम बिन तो वाहवाही में भी वजन नहीं होता

3 टिप्पणियाँ

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श्यामल सुमन said...

बहुत खूब लिखा है आपने। खुद की कूछ पंक्तियाँ याद आयीं-

तेरी आँखों में गर कोई, मेरी तस्वीर बन जाये।
मेरी कविता भी जीने की, नयी तदबीर बन जाये।
बडी मुश्किल से पाता है कोई दुनियाँ में अपनापन,
बना लो तुम अगर अपना, मेरी तकदीर बन जाये।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com


दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मन में बहुत रच बस गई है।


VaRtIkA said...

bahut sunder

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