एक निगाह इधर भी
अगर हाथ में कैमरा लग जाये तो तस्वीर लिये बिना मन नहीं लगता. तो कल से मेरे हाथ में एक कैमरा लग गया है. तो, अब यदा-कदा तस्वीरें भी प्रदर्शित की जायेगीं. नमूने के तौर पे यह रहा.

यह दृश्य है, पवई झील का. यह मनोरम ्तस्वीर IIT के प्रांगण से ली गयी है. (मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक)
इसके बाद एक और महत्वपूर्ण बात. पिछले साल मै रोमन में लिखा करता था. तो एक पुरानी कविता प्रस्तुत है.
इस कविता के शब्द यहाँ हैं: क्या करूँ जो आँखें रोती हैं.
पिछले दिनॊं पोस्ट की गयी कविता: कोल्ड स्टोरेज वाला इंजीनियर को भी अब मैंने रिकार्ड किया है. यहाँ भी एक नजर डाली जाये.
और अगर आप मेरे ब्लोग के दाहिने साइडबार में दिख रहे निम्न तरह के बक्से को अपने ब्लोग पर डालना चाहते हैं.
तो पधारिये ब्लोग्बुद्धि पर.
यह दृश्य है, पवई झील का. यह मनोरम ्तस्वीर IIT के प्रांगण से ली गयी है. (मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक)
इसके बाद एक और महत्वपूर्ण बात. पिछले साल मै रोमन में लिखा करता था. तो एक पुरानी कविता प्रस्तुत है.
इस कविता के शब्द यहाँ हैं: क्या करूँ जो आँखें रोती हैं.
पिछले दिनॊं पोस्ट की गयी कविता: कोल्ड स्टोरेज वाला इंजीनियर को भी अब मैंने रिकार्ड किया है. यहाँ भी एक नजर डाली जाये.
और अगर आप मेरे ब्लोग के दाहिने साइडबार में दिख रहे निम्न तरह के बक्से को अपने ब्लोग पर डालना चाहते हैं.
तो पधारिये ब्लोग्बुद्धि पर.

