आज मैं कविता नहीं लिखूंगा

आज मैं कविता नहीं लिखूंगा
आज भाग जाऊँगा।

जो भी भावनाएं उमड़ेंगीं
जो भी अन्तस का उद्वेलन होगा
सबसे भाग जाऊँगा।

आंसुओं की क्रीडा
और हास्य का विलाप
सब कुछ अनदेखा कर दूँगा।

आज का वक्त
काव्य की व्यर्थ धारा में
बहने ना दूँगा।

आज का उजास दिन
भावात्मक विनिमय के नाम ना होने दूँगा।

आज भी 'कल' सा हो जाए
तो 'कल' का क्या होगा?

कल और कल के बीच के आज को
मैं काल के हाथों से खींच लूंगा
और भाग जाऊँगा।

5 टिप्पणियाँ

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Mired Mirage said...

:)भागकर जाने को कोई स्थान है क्या?
घुघूती बासूती


Udan Tashtari said...

कल और कल के बीच के आज को
मैं काल के हाथों से खींच लूंगा
और भाग जाऊँगा।



बहुत उम्दा, विकास.


Raviratlami said...

... और आज मैं कविता पढूंगा, सुनूंगा, गाऊंगा, गुनगुनाऊंगा... :)


anitakumar said...

कौन से नये जूते खरीदे-वुडलैंड या रीबोक्…:)


कंचन सिंह चौहान said...

apani bhavanaon se bhag kar jahan jaya jaa sakta ho us sthan ka naam hame bhi bataiyega ..ham bhi chalenge

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  • मेरे बारे में

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    विकास कुमार
    मैं एक स्वप्नद्रष्टा हूँ. हर वक्त सपने देखने का साहस करता हूँ और उन्हें सच मानने की मूर्खता. मुझमें असंभव की आकांक्षा है और मैं जीवन के अध्ययन में प्रयत्नरत हूँ.
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