अच्छा है तुम्हारे हाथ में कैमेरा है बंदूक नहीं । सूरज के साथ साथ खुद को शूट करने का मोह छोड़ नहीं पाए हंय । बहरहाल सारे सूरज अच्छे लगे आखिरी तस्वीर वाले सूरज पर ग्रहण लगा दिखा । फोटोग्राफर अच्छे बन सकते हो । सूरज हो गया अब चांद की बारी है ।
इन चित्रों को देख अपनी एक पुरानी कविता याद आ गई हालाँकि ये शूट उसे अभिव्यक्त नहीं कर पाएंगे। इसलिए लिख रहा हूँ शायद अब की बार वह कविता शूट हो जाए तो दोनों को एक साथ पेश किया जाए। " उस ने आते ही कटार मार दी सूरज के सीने में और रवि रवि रक्त से रक्त सा हो गया हो गया साम्राज्य, फिर उस क्रूर कलुषित रात्रि का जिस की अग्रदूत बन आई थी वह निर्दयी सांझ जिस की अग्रदूत बन आई थी, वह निर्दयी सांझ......"
कला को बस माध्यम चाहिये बाहर निकलने का ..
केमेरा ही सही अब !
और ये आखिरी तस्वीर कुद्द ’दूबते सूरज’ के अन्दर जमी नही ...
अच्छा है तुम्हारे हाथ में कैमेरा है बंदूक नहीं । सूरज के साथ साथ खुद को शूट करने का मोह छोड़ नहीं पाए हंय । बहरहाल सारे सूरज अच्छे लगे आखिरी तस्वीर वाले सूरज पर ग्रहण लगा दिखा । फोटोग्राफर अच्छे बन सकते हो । सूरज हो गया अब चांद की बारी है ।
लुक्खा फोटोग्राफर
तस्वीर बनाये क्या कोई, क्या कोई लिखे तुझपे कविता :)
---सत्य वचन,,बालक..बाकी तो बढ़िया हहिये है..मेरे यह चौचक और सच की अभिव्यक्ति. :)
What a splendid sight!
Bravo with your evenings ventures at the lake side :)
(i know the smiley looks ridiculous, but hey...)
इन चित्रों को देख अपनी एक पुरानी कविता याद आ गई हालाँकि ये शूट उसे अभिव्यक्त नहीं कर पाएंगे। इसलिए लिख रहा हूँ शायद अब की बार वह कविता शूट हो जाए तो दोनों को एक साथ पेश किया जाए।
" उस ने आते ही
कटार मार दी
सूरज के सीने में
और रवि
रवि रक्त से
रक्त सा हो गया
हो गया साम्राज्य, फिर
उस क्रूर कलुषित रात्रि का
जिस की अग्रदूत
बन आई थी
वह निर्दयी सांझ
जिस की अग्रदूत बन
आई थी, वह निर्दयी सांझ......"
मुझे इस कविता के शूट की प्रतीक्षा रहेगी।
सुदर.... बहुत सुंदर
विकास जी आप तो नये रंग चुनकर ला रहे हैं।
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