जो हैं हमारी बातो में, ख्वाबों में रातों में...

जो हैं हमारी बातो में, ख्वाबों में रातों में
उनकी जज़्बातों में शामिल नहीं हूँ मैं...
समझा जिन्हें मंजिल, तोड़ा उन्होंने दिल
कहते हैं उनके प्यार के काबिल नहीं हूँ मैं.
ओ दिल ना हो उदास, मैं हूँ तुम्हारे पास
जुर्म 'है' उनका मगर कातिल नहीं हूँ मैं.
जब लीलेगा मंझधार, ना होगी नैय्या पार
उस बार ’हम’ कहेंगे, साहिल नहीं हूँ मैं.
हम उनके हैं करीब, पर फूटा ये नसीब
उनके सूर्ख होठों को हासिल नहीं हूँ मैं.
उनकी जज़्बातों में शामिल नहीं हूँ मैं...
समझा जिन्हें मंजिल, तोड़ा उन्होंने दिल
कहते हैं उनके प्यार के काबिल नहीं हूँ मैं.
ओ दिल ना हो उदास, मैं हूँ तुम्हारे पास
जुर्म 'है' उनका मगर कातिल नहीं हूँ मैं.
जब लीलेगा मंझधार, ना होगी नैय्या पार
उस बार ’हम’ कहेंगे, साहिल नहीं हूँ मैं.
हम उनके हैं करीब, पर फूटा ये नसीब
उनके सूर्ख होठों को हासिल नहीं हूँ मैं.

क्या बात है विकास जी,ये तो गज़ल की तरफ़ मुड़ रहे हैं।
हम उनके हैं करीब, पर फूटा ये नसीब
उनके सूर्ख होठों को हासिल नहीं हूँ मैं.
This is too good. Keep it up.
बहुत खूब...तबियत ठीक है>>?? दिखते नहीं हो न हमारी पोस्ट पर..इसलिये पूछा. :)
उनकी जज़्बातों=उनके जज़्बातों
बेहतरीन उम्दा रचना...और लिखो..एक्जाम के बाद, शुभकामनायें. :) अप्रेल एंड में बम्बई में हूँ २७ अप्रेल को वहीं से कनाडा की उड़ान है...
Any points for guessing who this is written for? :P
just kidding! I won't torture you with this question of 'who was the inspiration behind this poem'..cuz hey, it's none of my business, right?! and don't we poets hate that question?!
Anyways, i enjoyed this penning, especially the closing lines. But when you hear the audio, this one sounds a bit aggressive, was that intentional?
Keep writing!!
nice one indeed!I also liked the background music
any clue on how to get comments in the RSS Feed too?
and BOLs for PAF
ekdam fundoo bana dijiyega
maja hi aa jayega PAF se
~$udhi :)
हम उनके हैं करीब, पर फूटा ये नसीब
उनके सूर्ख होठों को हासिल नहीं हूँ मैं.
बढ़िया लिखा है बंधू...बधाई
thanks!!! :)
अच्छी कविता और बड़िया पढ़ा हुआ
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