कनुप्रिया : पूर्वराग

धर्मवीर भारती की कनुप्रिया प्रारंभ से ही मुझे प्रिय रही है। सो मैंने सोचा कि इसे रेकॉर्ड करूं। प्रस्तुत है पहला अंश जिसका नाम है: पूर्वराग। इसके अतिरिक्त चार अंश और भी हैं: मंजरी-परिणय, सृष्टि-संकल्प, इतिहास एवं समापन। एक एक करके सबको आवाज देने की चाह है।

1. पहला गीत


2. दूसरा गीत


3. तीसरा गीत


4. चौथा गीत


5. पांचवां गीत

5 टिप्पणियाँ

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Manish said...

इस प्रस्तुति की बधाई। पर क्या तुम्हें नहीं लगता कि आवाज के साथ साथ ये गीत व्यक्ति पढ़ना भी चाहेगा।


Parul said...

मनमोहक प्रस्तुति …।


yunus said...

विकास अच्‍छी शुरूआत लगे रहो ।


Udan Tashtari said...

अच्छी प्रस्तुति. मनीष भाई की बात पर गौर किया जाये.


विकास कुमार said...

धन्यवाद सबों का!

जया झा जी ने यहाँ पूरी कनुप्रिया रखी है.

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  • मेरे बारे में

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    विकास कुमार
    मैं एक स्वप्नद्रष्टा हूँ. हर वक्त सपने देखने का साहस करता हूँ और उन्हें सच मानने की मूर्खता. मुझमें असंभव की आकांक्षा है और मैं जीवन के अध्ययन में प्रयत्नरत हूँ.
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