प्रयास: क, निष्ठा: क, सफलता: ?
मेरे विद्यालय में जो स्कोर कार्ड मिलता था उसपे हर विषय के आगे तीन कॉलम होते थे। प्रयास, निष्ठा और सफलता। और इन तीनों में हमें क से घ तक का ग्रेड दिया जाता था। कोई कोई प्रयास घ होने पर भी सफलता में क पाता था और कोई सफलता और निष्ठा दोनो मे क के बावजूद सफलता मे घ पाता था।
मेरे नेतरहाट विद्यालय की अनेकानेक खूबियों मे से एक खूबी यह भी थी कि केवल परीक्षा के अंक (सफलता कॉलम) ही मत्वपूर्ण नही थे वरन शिक्षक एवं विषय के प्रति निष्ठा और प्रयास भी अनिवार्य एवं स्तुत्य थे।
वस्तुतः मैं बात किसी और चीज की करना चाहता था और दिमाग मे ये सारी चीजें आ गयी। अब मूल विषय पर आता हूँ। कल मुझे बहुत बडे बडे ब्लोगरों से मिलाने का सौभाग्य मिला। (विस्तृत रिपोर्ट बाद मे)। उन लोगों ने मुझे प्रेरणा दी कि मैं अपने तकनीकी ज्ञान का उपयोग लोगों (खासकर ब्लोगरों) की समस्याओं का समाधान निकालने मे करूं। अब मुझमे इतना ज्ञान है या नही, यह बात दीगर है - पर बात मुझे रास आई। सो, ऐसी कोशिश करने की आकांक्षा जाग गयी।
पर मेरे मन मे एक डर पैर पसार रहा था कि ना जाने मैं इस पुनीत कार्य के प्रति कितना न्याय बरत पाऊँगा, कितना समर्पित रह पाऊँगा। (वैसे ही भाँती भाँती के मेरे कई ब्लोग निष्क्रिय हैं)। फिर मेरे दिमाग मे मेरे स्कूल वाली बात याद आई। (आह! पुरानी बातें कितनी प्रेरणादायक होती हैं)
अब सफलता के आगे भले ही प्रश्न चिन्ह लगा रहे, लेकिन प्रयास और निष्ठा - इन दो कॉलमों पर तो अपना अधिकार है ही। सो भगवान् का नाम लेके कार्य कि शुरुआत कर दी है।
आप भी पधारें। लिंक यह रहा:
अपनी समस्या मुझे इस लिंक द्वारा भेज सकते हैं: (ब्लोग की पहली पोस्ट) http://blogbuddhi.blogspot.com/2007/11/blog-post_28.html
मैंने साज सज्जा पर बिल्कुल भी ध्यान नही दिया है। टेम्पलेट बिल्कुल सादा है क्यूंकि उपयोगी चीजों में सादगी का होना अनिवार्य समझता हूँ.

1 टिप्पणियाँ:
इस कार्य के लिए आप साधुवाद स्वीकारें. मैं जरुर अपनी ब्लोगीय समस्याओं से आपको अवगत करूँगा.
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