हम भी देखेंगे तमाशा, गर मिली फुरसत

कभी करता हूँ तुमको याद, अश्कों के बूँदों से
कभी शबनम से वो हिस्सा साफ कर देता.
तेरी मुहब्बत के फ़साने, ना आते जो मुझ तक
इस जनम में ही मैं तुझको माफ कर देता.

सुनता हूँ अब हर ओर तेरी रुसवाई के चरचे
जुल्फ़ों का जिक्र, सूरत-ए-आशनाई के चरचे
दिल तोड़कर सौपा है अपना दिल जिसे तुमने
होते हैं हर ओर उसकी बे-वफ़ाई के चरचे

जाने होगा क्या अब ये अंजाम-ए-मुहब्बत
दो बेवफ़ाओं की वफ़ा, अरे वाह रे कुदरत!
किरचे मेर दिल के दिखाया दुनिया को तूने
हम भी देखेंगे तमाशा, गर मिली फुरसत

6 टिप्पणियाँ

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tanha kavi said...

सुनता हूँ अब हर ओर तेरी रुसवाई के चरचे
जुल्फ़ों का जिक्र, सूरत-ए-आशनाई के चरचे
दिल तोड़कर सौपा है अपना दिल जिसे तुमने
होते हैं हर ओर उसकी बे-वफ़ाई के चरचे


क्या बात है मियाँ! दिल खुश कर दिया आपने।

-विश्व दीपक 'तन्हा'


आलोक कुमार said...

जाने होगा क्या अब ये अंजाम-ए-मुहब्बत
दो बेवफ़ाओं की वफ़ा, अरे वाह रे कुदरत!....

ab aap professional shaayar ho gaye..:))


Anonymous said...

कभी करता हूँ तुमको याद, अश्कों के बूँदों से
कभी शबनम से वो हिस्सा साफ कर देता.

kaafi sundar lines hai ...kya aapney iss baat ko vyakt karney ki koshish kari hai ki shayar raat raat bhar ashk bahata tha aur subah jab " shabnam" chaa jaati toh shayar so jaata tha?

किरचे मेर दिल के दिखाया दुनिया को तूने
हम भी देखेंगे तमाशा, गर मिली फुरसत

waah waah dil choo liya iss line ne


पुनीत ओमर said...

विकास जी, वैसे मैं आम तौर पर ऐसी बेवफाई के गम में डूबी शायरी या कवितायें पढता तो नहीं हू, पर आपका शीर्षक अच्छा लगा तो आ ही गया. ज्यादा तो नही पर शीर्षक लाइन वाकई में अच्छी बन पड़ी है. लिखते रहें. आप में वाकई में बात है


dm said...

विकास bhai padh kar maza aa gaya.
tussi gr8 ho[:)]


विकास कुमार said...

तन्हा जी!
मुझे खुशी हुई कि आपका दिल खुश हो गया. :)

आलोक!
professional क्या होता है - ये तो पता नहीं. लेकिन इसका भरोसा दिलाता हूँ कि लिखना मेरा पेशा नहीं. ;)

बेनामी जी - परिचय ना देने का कोई ठोस कारण होगा आपके पास. इस्लिए अब ज्यादा नहीं पूछूँगा. आपने मेरी पंक्तियों को समझा - यही पर्याप्त है.

पुनीत जी!
चलिए कम से कम अभी शीर्षक तो अच्छा लगा आपको. कभी पूरा पोस्ट भी पसंद आ जायेगा.

और dm जी! एक बार फिर से आपको धन्यवाद!

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    विकास कुमार
    मैं एक स्वप्नद्रष्टा हूँ. हर वक्त सपने देखने का साहस करता हूँ और उन्हें सच मानने की मूर्खता. मुझमें असंभव की आकांक्षा है और मैं जीवन के अध्ययन में प्रयत्नरत हूँ.
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