स्याह
वश चलता तो तुझे अपने दिल के अरमान दिखाता
तेरे हिस्से का सागर और अपना आसमान दिखाता
पर तेरी बेवफ़ाई का सूरज, इस रुसवाई से चमक गया
कि सागर गया सूख और नीला रंग स्याह से ढँक गया.
तेरे हिस्से का सागर और अपना आसमान दिखाता
पर तेरी बेवफ़ाई का सूरज, इस रुसवाई से चमक गया
कि सागर गया सूख और नीला रंग स्याह से ढँक गया.

Haan dost sahi kehte ho tumne mere saath bewafai ki hai....nahiiiii
beautiful 4 liners.. wish nila syah of your's keep on spraying out such poetic masterpieces
beautiful...
"bevafai ka suraj is rusvai se chamak gaya" nice xpression....usi syaah rang se syahi chura k likhte rehte hain...
hgjk kj olj hb ggfyuju l ppk fgfu joi okop ydghj kjlklkj lmlk lkmm kj lklkj jjklh jufcdh klpocxcx jkhkjl jjjkk lklk ;lkjk बेफाई के सूरज से सागर तो सूखा,,,मगर जब सूरज से स्याह से ढँक गया to aisI TippanI karanI paDxI!!!
ha ha ha
nice lines...
Very nice...
बेनामी जी! आपका कहा कुछ पल्ले नहीं पड़ा. (थोड़ा परिचय देते तो अच्छा होता).
मिसरा जी! ये आपके लिये नहीं था! और मुझे कभी याद नहीं कि मैने किसी मित्र से बेवफ़ाई की हो. ;)
वर्तिका, राहुल, आलोक, मीनाक्षी - तुम लोगों की बदौलत ही कुछ कमेंट्स आते हैं. उत्साह बढाते रहो. ;)
dm जी, आपका प्रोफ़ाइल नही देख पा रहा, सो आप मेरे लिये anonymous ही हैं - आभार आपका.
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