चेहरा बदल लिया

तेरी याद ना फेंक सका दिल से तो चेहरा बदल लिया

तू आये मेरे सामने, और फिर उड़ जाये रंग तेरा
ये ढंग ना मुझे पसंद प्रिय, सो चेहरा बदल लिया

तेरे गम में दिल रोया होगा, अब तो पता नहीं चलता
भींगी पलकें तुझे ना भायी, तो चेहरा बदल लिया

शक्ल से मेरी नफ़रत तुमको, पर मेरे दिल में बेताबी है
अब शायद तुझे देख सकूँ, अब चेहरा बदल लिया

भीड़ में गुम होना आसां अब, कोई नहीं पहचानेगा
तुम भी भूल मुझे जाओगी, जो चेहरा बदल लिया.

5 टिप्पणियाँ

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बाल किशन said...

अच्छी कविता है. सच है चेहरा बदल जाय तो बहुत सी परेशानियों का हल निकल आए. लाजवाब.


पुनीत ओमर said...

कविता अच्छी है विकास जी. प्रयास जारी रखें.


prabhakar said...

क्या बात है विकास जी
यह तो रदीफ़ के साथ गज़ल है


परमजीत बाली said...

बहुत बढिया! विकास।


विकास कुमार said...

धन्यवाद आप सबों का. :)

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  • मेरे बारे में

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    विकास कुमार
    मैं एक स्वप्नद्रष्टा हूँ. हर वक्त सपने देखने का साहस करता हूँ और उन्हें सच मानने की मूर्खता. मुझमें असंभव की आकांक्षा है और मैं जीवन के अध्ययन में प्रयत्नरत हूँ.
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