चेहरा बदल लिया
तेरी याद ना फेंक सका दिल से तो चेहरा बदल लिया
तू आये मेरे सामने, और फिर उड़ जाये रंग तेरा
ये ढंग ना मुझे पसंद प्रिय, सो चेहरा बदल लिया
तेरे गम में दिल रोया होगा, अब तो पता नहीं चलता
भींगी पलकें तुझे ना भायी, तो चेहरा बदल लिया
शक्ल से मेरी नफ़रत तुमको, पर मेरे दिल में बेताबी है
अब शायद तुझे देख सकूँ, अब चेहरा बदल लिया
भीड़ में गुम होना आसां अब, कोई नहीं पहचानेगा
तुम भी भूल मुझे जाओगी, जो चेहरा बदल लिया.
तू आये मेरे सामने, और फिर उड़ जाये रंग तेरा
ये ढंग ना मुझे पसंद प्रिय, सो चेहरा बदल लिया
तेरे गम में दिल रोया होगा, अब तो पता नहीं चलता
भींगी पलकें तुझे ना भायी, तो चेहरा बदल लिया
शक्ल से मेरी नफ़रत तुमको, पर मेरे दिल में बेताबी है
अब शायद तुझे देख सकूँ, अब चेहरा बदल लिया
भीड़ में गुम होना आसां अब, कोई नहीं पहचानेगा
तुम भी भूल मुझे जाओगी, जो चेहरा बदल लिया.

अच्छी कविता है. सच है चेहरा बदल जाय तो बहुत सी परेशानियों का हल निकल आए. लाजवाब.
कविता अच्छी है विकास जी. प्रयास जारी रखें.
क्या बात है विकास जी
यह तो रदीफ़ के साथ गज़ल है
बहुत बढिया! विकास।
धन्यवाद आप सबों का. :)
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