निर्माण
सूरज से रोशनी, चंदा से चाँदनी, फूलों से खुशबू चुराया
सपनों के सागर में, गीतों को गूंधा; प्यार में उसको मिलाया
तब जाके मेरे खुदा ने सनम, फुरसत से तुझको बनाया
अल्हड़ घटाओं से उसने, जुल्फें तेरी हैं सजायी
सागर से गहराई मांगी फिर आँखें तेरी है बनायी
सम्मोहन का काला जादू, भौहों को तेरे सिखाया
तब जाके मेरे......
सपनों के सागर में, गीतों को गूंधा; प्यार में उसको मिलाया
तब जाके मेरे खुदा ने सनम, फुरसत से तुझको बनाया
अल्हड़ घटाओं से उसने, जुल्फें तेरी हैं सजायी
सागर से गहराई मांगी फिर आँखें तेरी है बनायी
सम्मोहन का काला जादू, भौहों को तेरे सिखाया
तब जाके मेरे......

वाह विकास भाई ।
तब जाके मेरे महबूब नें मुझसे दिल लगाया ।
www.aarambha.blogspot.com
बहुत बढ़िया, विकास. लगे रहो.
क्या बात है... साहित्य वार्ता के लिये तैयार है न?
बहुल सुंदर । क्या कमाल की सोच है ।
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