पुतले
मैं इंसान हूँ
कुछ लोग मुझे पुतले भी कहते हैं.
पुतलों में एक खास बात होती है -
वे स्वतंत्र होते हैं.
सर, पाँव से स्वतंत्र
हाथ, धड़ से स्वतंत्र
मानों हर अंग
अलग अलग एक पुतला हो.
मैं छोटे पुतलों से बना
एक बड़ा पुतला हूँ.
पर मेरे पुतले छटपटाते हैं
कभी कभी नोंच खाते हैं
धागे की धार से
मेरी उंगलियाँ कट जाती हैं
और खून की तरह सफ़ेद जीवन
बहने लगता है.
हवाओं में
मौत की मात्रा बढ़ जाती है.
धीमे चलने वाली साँस भी
तेजी से मेरा उम्र पीने लगती है.
धीरे धीरे मैं रीत जाता हूँ
खाली हो जाता हूँ.
तुम मेरी मौत का मातम मनाते हो
और मैं अपनी आजादी का गीत गाता हूँ.
मैं इंसान हूँ
कुछ लोग मुझे पुतले भी कहते हैं.
कुछ लोग मुझे पुतले भी कहते हैं.
पुतलों में एक खास बात होती है -
वे स्वतंत्र होते हैं.
सर, पाँव से स्वतंत्र
हाथ, धड़ से स्वतंत्र
मानों हर अंग
अलग अलग एक पुतला हो.
मैं छोटे पुतलों से बना
एक बड़ा पुतला हूँ.
पर मेरे पुतले छटपटाते हैं
कभी कभी नोंच खाते हैं
धागे की धार से
मेरी उंगलियाँ कट जाती हैं
और खून की तरह सफ़ेद जीवन
बहने लगता है.
हवाओं में
मौत की मात्रा बढ़ जाती है.
धीमे चलने वाली साँस भी
तेजी से मेरा उम्र पीने लगती है.
धीरे धीरे मैं रीत जाता हूँ
खाली हो जाता हूँ.
तुम मेरी मौत का मातम मनाते हो
और मैं अपनी आजादी का गीत गाता हूँ.
मैं इंसान हूँ
कुछ लोग मुझे पुतले भी कहते हैं.
class poem hai ye to....har pankti apne aap mein ek granth maloom padti hai......
तुम मेरी मौत का मातम मनाते हो
और मैं अपनी आजादी का गीत गाता हूँ.
अति सुन्दर ...
Vikasji
Bahut hi sunder aagaz hai is kavita ka.
मैं इंसान हूँ
कुछ लोग मुझे पुतले भी कहते हैं.
Bahut pasand ayi.
Daad ke saath
Devi nangrani
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