12 August, 2007

२००७ की कुछ फ़िल्में

मैंने इस सप्ताहांत पर २००७ की कुछ फ़िल्में देखीं। उनके बारे मे बता रहा हूँ।

  • Bombay to goa: सुनील पाल और राजू श्रीवास्तव जैसे लोग टी.वी पर तो अच्छे लगते हैं पर फिल्मों मे...? मुझे तो कुछ खास मजा नही आया। सोचा था कि कम से कम हँसी आएगी, वो भी नही। पता नही कोई इतने पैसे खर्च करके ऐसी फिल्म क्यों बनाता है।

  • 88 minutes: किसी ने आपको जीने के लिए ८८ मिनट का वक्त दिया है और आप लगे हुए हैं उस अपराधी को पकड़ने मे। थ्रिलर अच्छा है लेकिन नयापन कुछ नहीं। वही घिसा पिटा स्टाइल। इसे देखा जा सकता है लेकिन जायदा उम्मीद लेकर नही।

  • Evan Almighty: Bruce almighty अगर आपको याद है तो यह फिल्म जरूर देखें। सामान्यतया सीरीज मे बनने वाली फिल्मों की पहली फिल्म बहुत ही अच्छी होती है और बाक़ी धीरे धीरे खराब होने लगती हैं। Spiderman इसका एक अच्छा उदहारण है। लेकिन मैं इस फिल्म को अपवादों की श्रेणी मे रखना चाहूँगा। कल्पनाशीलता मे इसे १०० मे १०० अंक मिलने चाहिऐ. जरूर देखें! इस फिल्म के एक संवाद ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मैं वाक्य को अनुवादित करके इसकी सुन्दरता नही बिगाड़ना चाहता। सो, अंग्रेजी मे प्रस्तुत कर रहा हूँ।
    Let me ask you something। If someone prays for patience, you think God gives them patience? Or does he give them the opportunity to be patient? If he prayed for courage, does God give him courage, or does he give him opportunities to be courageous? If someone prayed for the family to be closer, do you think God zaps them with warm fuzzy feelings, or does he give them opportunities to love each other?

  • The zodiac: एक और थ्रिलर। आजकल अपेक्ष्क्रित थ्रिलर ज्यादा बन रहे हैं शायद। यह फिल्म एक वास्तविक हत्यारे के जीवन पर बनी है। कुछ बताऊंगा नही, मजा ख़त्म हो जाएगा। असाधारण नही पर हाँ! यह देखने योग्य जरूर है।

  • Sunshine : एक साइंस फिक्शन फिल्म। 'The core' याद है? अच्छी लगी तो यह भी देखें। यद्यपि मुझे देखते देखते कई जगह यह प्रतीत हुआ की फिल्म लेखक ने विज्ञान के सीधा नियमों की भी अनदेखी कर दी है। इस तरह की फिल्मों मे जो हक़ीकत का पुट लिए कल्पना होती है, वह मजेदार होती है। बहुत सारी चीजें और बेहतर हो सकती थी।
शेष फिर कभी....:)

3 टिप्पणियाँ:

yunus said...

सही है भीडू । और फिल्‍मों के बारे में बताओ ज़रा ।

mahashakti said...

बढि़यॉं

Udan Tashtari said...

सही है. जारी रहो. खूब फिल्में देखो और दूसरों को समय खराब करने से बचाओ. यह एक प्रकार की समाज सेवा है.

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