13 August, 2007

यही जिंदगी है, यही जिंदगी है

कोई बता दे ये क्या जिंदगी है?
दुआ है या कोई सजा जिंदगी है?
आंखों से देखा
ये किस्मत का लेखा
नियति की काली बही जिंदगी है।
यही जिंदगी है, यही जिंदगी है।

दिल की जो बातें हैं, दिल मे ही रखना
जो दिल टूट जाये तो दिल मे सिमटना
दिल की तड़प से, कलपना बिलखना
फिर भी इबादत, मे दिल की मुहब्बत
की खातिर सौ सौ सजदे मे गिरना

सजदे मे गिरना, यही दिल्लगी है
यही दिल्लगी है, यही जिंदगी है।

वो तेरा आना, नजरें चुराना
बन अजनबी सा, मुँह फेर जाना
मेरी धड़कनों को ना आये भरोसा
लगता है जैसे ये नज़रों का धोखा
यादों के आँचल मे चेहरा छुपाना
नैनों की धारा से सागर बनाना

सागर बनाना, यही आशिकी है
यही आशिकी है, यही जिंदगी है।

कोई बता दे ये क्या जिंदगी है?
दुआ है या कोई सजा जिंदगी है?

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मेरी आवाज मे यह गीत यहां सुनें। शब्द तो मेरे अपने हैं ही, इसमे हल्का फुल्का जो भी संगीत है, मेरा अपना है। और आवाज भी मेरी ही है। पसंद आये तो आशीर्वाद दीजिए, नही तो बालक की चंचलता जान कर क्षमा करें। टिप्पनिओं द्वारा अपने विचारो से अवश्य अवगत कराएँ।

2 टिप्पणियाँ:

manya said...

अच्छा लगा.. पर बहुत बेहतरीन नहीं.. पहले जो पढा है.. लगा और अच्छा लिख सकते हो..

Divine India said...

अच्छी कविता… भाव को पिरोया है… सुंदर!!!

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