बचना ओ हसीनों! लो मैं आ गया...!
मैं जानता हूँ कि मेरे ब्लोग पर आने वाले अधिकांश जन अ-हसीं हैं परंतु फिर भी मैंने अपने शीर्षक को ऐसा नाम दिया है। सो, सेंसिटिव किसम के लोगों से क्षमायाचना करता हूँ। (वैसे आजकल मांगने से कहॉ कुछ मिलता है? मैं तो बस थोडा सा फोर्मल हो रहा था।)
बहुत दिनों बाद कुछ दिनों के लिए घर गया था। काफी अच्छा लगा और एक बार फिर जमीनी हकीकत से रूबरू होने का मौका मिला, जो कॉलेज मे नहीं मिलता। इस संबंध मे कभी डिटेल में लिखूंगा। अभी अभी आया हूँ, यात्रा कि थकान उतर जाये, फिर क्या...??? आपको बोर करने का तो ठेका हम लिए ही बैठे हैं।
बहुत लोगों के पोस्ट्स नहीं पढ़ पाया, लेकिन अब वो सारी कमी पूरी करूंगा। सो, मेरी अनुपस्थिति का बदला मेरे ब्लोग से ना लें। :)
बहुत दिनों बाद कुछ दिनों के लिए घर गया था। काफी अच्छा लगा और एक बार फिर जमीनी हकीकत से रूबरू होने का मौका मिला, जो कॉलेज मे नहीं मिलता। इस संबंध मे कभी डिटेल में लिखूंगा। अभी अभी आया हूँ, यात्रा कि थकान उतर जाये, फिर क्या...??? आपको बोर करने का तो ठेका हम लिए ही बैठे हैं।
बहुत लोगों के पोस्ट्स नहीं पढ़ पाया, लेकिन अब वो सारी कमी पूरी करूंगा। सो, मेरी अनुपस्थिति का बदला मेरे ब्लोग से ना लें। :)

चलो अच्छा है कि वापस आ गए , लौट के बुद्धू ब्लॉगजगत में वापस आए, सही है ना।:)
बिना बताये गये थे ये तो गलत बात है. हम खाम खाँ परेशान हो रहे थे. :)
आओ फिर् से स्वागत् है।
welcome back !!!
जब नहीं आये थे तुम तब भी तो तुम आए थे...............blah blah blah
चलो अच्छा है तुम आ गये ।
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