सिंगल होने का सबसे बड़ा घाटा
डरिये नहीं, यहाँ घाटे से मेरा तात्पर्य अर्थ-हानि से नहीं है। (वैसे, दहेज़ लोलुप लोगों के लिए तो सिंगल होना घाटे का ही सौदा है। जितनी जल्दी अ-सिंगल हो जाईये, दहेज़ का ब्याज उतना ज्यादा हो जाएगा)। तो भैया...!! ई घाटा जे है...उ हम अप्पन एक्सपीरीयांस से बता रहे हैं। किसी को आपत्ति हो तो जाके दो बार नहा आयियेगा, भेजा ठंडा हो जाएगा। इसके लिए हमे डिस्टर्ब करे का कोई जरूरत नाही है।
यदि आप सिंगल हैं तो यदा कदा दोस्त लोग आपके वेतन के पैसे उधार ले लेंगे- ये कहके कि यार तू तो सिंगल है, तेरा कोई खर्च नही। और ये कहके वापस नही देंगे कि - 'यार! समझा कर। डब्ल हूँ। खर्चा ज्यादा है। बाद मे ले लियो। (और मन मे बोलेंगे कि 'तू कैसे समझेगा, तू तो सिंगल है')। लेकिन धन तो धूल है। मैं किसी भौतिक घाटे को घाटा कदापि ना कहूँगा। यहाँ मैं जिस घाटे की बात कर रहा हूँ, वो मानसिक है। अब आप भी सोचेंगे कि लड़का सठिया गया है। घाटा मानसिक कैसे? तो वो ऐसे कि अगर गलती से आपने प्रेम कविता लिखी, तो कोई आपको उसका क्रेडिट नहीं देगा। बल्कि किसी 'प्रेरणा' को उसका क्रेडिट दिया जाएगा। विश्वास नही होता तो मेरी पिछली पोस्ट देख लें। ;) ये तो अन्याय हुआ ना जी? आख़िर भेजा हम खत्काएं, शब्द-कोशों के पन्ने पलट पलट के क्लिष्ट शब्द हम जोडें, अन्य (थोड़े कम फेमस) कवियों कि पंक्तियों से 'प्रेरणा' हम लें और क्रेडिट मिल जाये किसी काल्पनिक प्रेरणा को? घोर कलियुग है भाई!
यदि आप सिंगल हैं तो यदा कदा दोस्त लोग आपके वेतन के पैसे उधार ले लेंगे- ये कहके कि यार तू तो सिंगल है, तेरा कोई खर्च नही। और ये कहके वापस नही देंगे कि - 'यार! समझा कर। डब्ल हूँ। खर्चा ज्यादा है। बाद मे ले लियो। (और मन मे बोलेंगे कि 'तू कैसे समझेगा, तू तो सिंगल है')। लेकिन धन तो धूल है। मैं किसी भौतिक घाटे को घाटा कदापि ना कहूँगा। यहाँ मैं जिस घाटे की बात कर रहा हूँ, वो मानसिक है। अब आप भी सोचेंगे कि लड़का सठिया गया है। घाटा मानसिक कैसे? तो वो ऐसे कि अगर गलती से आपने प्रेम कविता लिखी, तो कोई आपको उसका क्रेडिट नहीं देगा। बल्कि किसी 'प्रेरणा' को उसका क्रेडिट दिया जाएगा। विश्वास नही होता तो मेरी पिछली पोस्ट देख लें। ;) ये तो अन्याय हुआ ना जी? आख़िर भेजा हम खत्काएं, शब्द-कोशों के पन्ने पलट पलट के क्लिष्ट शब्द हम जोडें, अन्य (थोड़े कम फेमस) कवियों कि पंक्तियों से 'प्रेरणा' हम लें और क्रेडिट मिल जाये किसी काल्पनिक प्रेरणा को? घोर कलियुग है भाई!
पी एस : अगर किसी को सुन्दर सुशील इच्छुक एवं 'सिंगल' प्रेरणा मिले तो कृपया मुझे तुरत सूचित करें।

अरे नहीं भई, सारा क्रेडिट तुम्हीं को दिया गया है. कोई घाटा मत नोट करो-बालक की कल्पना की उड़ान प्रेम कविताओं के ब्लॉगर इतिहासी पन्नों में हमेशा तुम्हारे नाम से दर्ज रहेगी. आने वाला कल और परसों सब तुम्हें याद करेंगे कि यही हैं वो!!! फिर कैसा घाटा... :)
अगर "प्रेरणा" की कोई बड़ी बहिन भी हो तो सोने पर सुहागा. (हम भी हैं लाइन में, काकेश जी की तरह)
विरोधी जी के लाईन मे खडे होने पर कोई विरोध तो नही होगा ना...??? (काकेश जी से पूछना पड़ेगा)
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