एक गीत

कुछ दिनों पहले मजाक मजाक मे एक गीत लिखा था। जिसे मैंने पुराने गीतों के आवाज एवं अंदाज मे दोस्तो को सुनाकर ख़ूब तालियाँ बटोरी। अब यहाँ सुना तो सकता नही....तो शब्द बताये देता हूँ। (के एल सहगल साहब अगर ये गाते, तो मजा आ जाता। मेरा इरादा स्वस्थ मनोरंजन का था और है।)

जो तू पास ना आए प्रीतम, जो तू पास ना आये
मन मेरा घबराए प्रीतम , मन मेरा घबराए
जो तू पास ना आये -2

आंखों मे तस्वीर है तेरी, आंखों मे तस्वीर
मैं रांझा तू हीर है मेरी, मैं राँझा तू हीर
पर जाने कब मिल पायें हम....२
फूटी है तकदीर रे प्रीतम, फूटी है तकदीर

अंखियों के आंसू तड़प तड़प के तुझको पास बुलाये
जो तू पास ना आए - २

तू आए तो आ जायेगी बिन बदल बरसात
तू आए तो चांदनी बरसेगी फिर सारी रात
बिन तेरे दुनिया सुनी है.....२
मान ले मेरी बात रे प्रीतम मान ले मेरी बात।

बिन तेरे मेरे दिल की ये बगिया सूखी जाये
जो तू पास ना आए -
दिल की धड़कन धड़क धड़क के तुझको पास बुलाये
जो तू पास ना आए -

जो तू पास ना आए प्रीतम, जो तू पास ना आये
मन मेरा घबराए प्रीतम , मन मेरा घबराए


5 टिप्पणियाँ

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Udan Tashtari said...

पॉड कास्ट के जरिये सुनवाओ न!!


परमजीत बाली said...

विकास जी,आप मे गीतकार बनने की प्रतिभा है। इसे इसी तरह बानाएं रखे।मेरी शुभकामनाएं स्वीकारें।


विकास कुमार said...

सुनावाता हूँ। अभी तो अनजान शहर मे हूँ, कैफे से पोस्ट लिखता हूँ। वापस जाते ही....ये गाना पोडकास्ट पर डालूँगा। :)


alok kumar said...

iske bol to bade hi damdaar likhe gaye hain...aage to ise sunne ke baad hi comment kiya ja sakta hai...


Nayi Subah said...

Arrey waah! bahut badhiya lika hai ...sun nahi payi...aaj hi earphone la ker sunoongi...dekhu to vikas kaisa gata hai?

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  • मेरे बारे में

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    विकास कुमार
    मैं एक स्वप्नद्रष्टा हूँ. हर वक्त सपने देखने का साहस करता हूँ और उन्हें सच मानने की मूर्खता. मुझमें असंभव की आकांक्षा है और मैं जीवन के अध्ययन में प्रयत्नरत हूँ.
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