...बनो
प्रेम है क्या? ये प्रीत है कैसी?
तुम इन सबका ज्ञान बनो।
मैं बन जाऊं जीवन तेरा
और तुम मेरी जान बनो।
मन की हर भटकन मे प्रीतम
संकेन्द्रित सा ध्यान बनो।
मैं तेरा सम्मान बन सकूं
तुम मेरा अभिमान बनो।
तुम इन सबका ज्ञान बनो।
मैं बन जाऊं जीवन तेरा
और तुम मेरी जान बनो।
मन की हर भटकन मे प्रीतम
संकेन्द्रित सा ध्यान बनो।
मैं तेरा सम्मान बन सकूं
तुम मेरा अभिमान बनो।

विकास भाई,
आपके ब्लॉग के साइडबार मे नारद का लिंक नही है, उसे लगाएं
सहायता के लिए नारद उवाच देखें।
बढ़िया है.
सुंदर रचना…बधाई!!!
सुन्दर भाव है।
aapke blog par bahut comment aate hain :))
last 2 lines..awesome..
(will i b fined fr commentin in angrezi?? :P)
Thanx for appreciating.
@jitendra ji
I'm working on it. Will do it soon.
@alok
isme hasne ki kya baat hai bhai...???
@parul
koi fine nahi. (prove karne ke liye mai bhi angrezi me type kar raha hoon.)
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