वृक्ष

यह वृक्ष जो तुम्हारे सामने खड़ा है
इसे कमजोर ना समझना.

माना कि इसमें पत्ते नहीं हैं
माना कि इसमें फूल नहीं खिलते
माना कि इसमें फल की संभावना नगण्य है.

माना कि इसमें इतनी ताकत नहीं
कि काल की कुल्हाड़ी से बच सके
मगर यह इतना कमजोर भी नहीं
कि वक्त के हल्के थपेड़े इसे गिरा दें

यह अडिग ना सही, परंतु
अपनी जड़ों को त्याग कर नहीं जिएगा
यह विवश हो अपना रक्त पी सकता है
मगर तुम्हारे आँसू नहीं पिएगा.

यह वृक्ष जो तुम्हारे सामने खड़ा है
इसे कमजोर ना समझना.

इसे मैंने
अपने स्वेद, रक्त
एवं आँसूओं से सींचा है.
तुम्हारी यादों की खाद डाली है.
नश्वर तो इस वृक्ष का माली है.
यह वृक्ष अनश्वर है.

पहचान सको तो पहचानो
इसकी ताकत को.
यह मेरे प्रेम का वृक्ष है.

0 टिप्पणियाँ

Make A Comment

Post a Comment


top